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शिवना प्रकाशन     मेरा मानना है कि कविताओं की पुस्तकें तीन तरह के घर की तरह होती हैं,  एक जिनमें प्रवेश द्वार होता है जो निष्कासन द्वार भी सबित हो जाता है, अर्थात जाइए इधर उधर देखिए वहीं खडे ख़ड़े, फिर निकल आइए । दूसरी तरह की पुस्तक में प्रवेश ... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज सुबीर
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[03 Jun 2010 02:58 AM]

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