हो कहीं भी शौचालय लेकिन शौचालय बनना चाहिए

आत्मदर्पण वैसे ये कला मैंने रवीश जी से सीखी है कि जहाँ भी जाओ, वहां की कुछ चीजें कैमरे में कैद कर लाओ और यादगार बनाओ | इस तरह की अपनी पहली पोस्ट में दुष्यंत साहेब की ग़ज़ल का पोस्टमार्टम आपके सामने रख रहा हूँ | दुष्यंत साहेब ने सोचा भी नहीं होगा की उनकी ग़ज़ल का... [पूरी पोस्ट]
writer गुड्डा गुडिया
views
18
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
4
[03 Jun 2010 02:05 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix