हो कहीं भी शौचालय लेकिन शौचालय बनना चाहिए
वैसे ये कला मैंने रवीश जी से सीखी है कि जहाँ भी जाओ, वहां की कुछ चीजें कैमरे में कैद कर लाओ और यादगार बनाओ | इस तरह की अपनी पहली पोस्ट में दुष्यंत साहेब की ग़ज़ल का पोस्टमार्टम आपके सामने रख रहा हूँ | दुष्यंत साहेब ने सोचा भी नहीं होगा की उनकी ग़ज़ल का...
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गुड्डा गुडिया
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[03 Jun 2010 02:05 AM]



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