भिखमंगों का ईश्वर

शब्द-सृजन की ओर... मंदिर के सामनेभिखमंगों की कतारेंएक साथ ही उनके कटोरेऐसे आगे बढ़ जाते हैंमानों सब यंत्रवत होंदस-दस पैसे की बाट जोहते वेमंदिर के सामने होकर भीमंदिर में नहीं जातेक्योंकि वे सिर्फएक ही ईश्वर को जानते हैंजो उनके कटोरे मेंपैसे गिरा देता है।... [पूरी पोस्ट]
writer KK Yadava

कविता

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[03 Jun 2010 00:18 AM]

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