कोई किसी का नहीं……
न जाने कैसे, कल मुझे सत्संग में लिवा जाने की जिद मेरे पिता श्री ने ठान ली, धमकाते हुए बोले – चल रहे हो कि नहीं…… उनके सामने मेरे मुँह से आज तक कभी “ना” नहीं निकला, बस मन में एक सोच आ गयी कि इनके प्रवचनों में आखिर क्या कमी रह गयी थी जो पूरी कराने ले जा...
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Manish
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[02 Jun 2010 23:53 PM]



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