कोई किसी का नहीं……

अधूरा सपना न जाने कैसे, कल मुझे सत्संग में लिवा जाने की जिद मेरे पिता श्री ने ठान ली, धमकाते हुए बोले – चल रहे हो कि नहीं…… उनके सामने मेरे मुँह से आज तक कभी “ना” नहीं निकला, बस मन में एक सोच आ गयी कि इनके प्रवचनों में आखिर क्या कमी रह गयी थी जो पूरी कराने ले जा... [पूरी पोस्ट]
writer Manish
views
17
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
7
[02 Jun 2010 23:53 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix