आराम की रोटी

पंजाबी लघुकथा जसवीर राणा ‘लगता है तीन बज चले होंगे! …सूरज भी ढल गया!…पर सरदार अब तक रोटी लेकर नहीं आया…।’ चहबच्चे की मुंडेर पर बैठे नीलू ने सूरज की ओर देखा। एक क्षण के लिए उसके चेहरे पर अफसोस-सा पसर गया। लेकिन अगले ही पल उसे चारपाई पर पड़े बीमार बाप की बात याद... [पूरी पोस्ट]
writer दीपशिखा

जसवीर राणा

views
19
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
4
[02 Jun 2010 21:44 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix