संस्कारित घोडा
मन के दरवाजे परउर्जा का बंधा घोडा,विचलित है दौड़ने के लिएअगर खोल दो उसे तो वह भागेगाकिसी कीले की ओर चढ़ाई के लिएया किसी मंदिर के सामने झुकने के लिए,किसी न किसी मकसद के लिये भागनाउसका संस्कार है,उसने कभी जाना ही नहीभागना बादल की तरहभागना हवा की...
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Arun Khadilkar
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[02 Jun 2010 21:13 PM]



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