कविता का मौसम
कविता का मौसम बस मुहाने पर ही है. गरमी तो वैसे भी कविता का पौधा सूख जाता है और बारिश के साथ लहलहा उठता है. सावन, बारिश, बरखा, मोर, मोरनी, झूला, छतरी, बदरी का आज भी, याने ए सी के जमाने में भी, बोलबाला बरकरार है. यहाँ तो खैर शाम से ही बारिश हो रही है, तब...
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Udan Tashtari
कविता
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[02 Jun 2010 21:00 PM]



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