खूं रगों में खाली है
बातों की बतीहर से रौशन, रातें काली काली हैरातें लम्बी लम्बी काली, खूं रगों में खाली हैहै उचक्का दिल अगर तो, दिनभर दिवाली हैतू कहीं गर रुक गया तो, वक़्त की तू साली हैहै बड़ा जालिम सिपाही, आँखों में तेरी लाली हैमिल गया हाथों से हाथ, तो समझना ताली हैये कबीरा...
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ritu raj
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[02 Jun 2010 12:45 PM]



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