राष्ट्र और समाज को समर्पित मेरी एक कविता
इस बार मैं मेरे ईश्वर प्रेमी साधको से माफ़ी चाहूँगा क्योंकि ये कविता भक्ति या प्रेम के ऊपर नहीं हैं । कुछ आदतवश भाव आ सकता हैं पर मैंने उस भाव को रोकने कि बड़ी कोशिश कि हैं । देश ओर समाज में जो आजकल हो रहा हैं । उससे कुछ बाते अच्छी हैं कुछ हौसला तोड़ देने...
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Virender Rawal
देश desh bhakti
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[02 Jun 2010 10:40 AM]



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