बसन्ती, मेरी जानेमन.. पापी पेट का सवाल है
अब से कुछ अरसा पहले जब धर्मयुग और साप्ताहिक हिन्दुस्तान जैसी पत्रिकाएं प्रकाशित हुआ करती थी तब ट्रकों के पीछे लिखे जाने वाले वाक्यों और शायरी को लेकर लिखे गए एक लेख से मैं बहुत प्रभावित हुआ था। यह लेख किस लेखक का था यह तो मुझे नहीं मालूम लेकिन पूरे लेख...
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राजकुमार सोनी
ट्रकों के पीछे शायरी
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[02 Jun 2010 10:20 AM]



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