देसिल बयना - 32 : घर में आग लगे, भर घर इजोत
-- करण समस्तीपुरी बाप रे बाप ! ओह... !! उ साल भी ऐसने झरकल (जला हुआ) गर्मी पड़ रहा था। किरिन के साथे लू चलने लगता था। लोग गोसाईं उगने से पहिलही मुंग-उंग तुडवा के घर पकर लेते थे। मगर घरो में का चैन था... ! घैला का पानी भी लगता था घुर पर चढ़ा के लाया है। उहो...
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करण समस्तीपुरी
करण समस्तीपुरी
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[02 Jun 2010 10:04 AM]



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