आँगन के कोने मे गुपचुप तुलसी सी उग जाती अम्मा....

दिल की कलम से... आज फिर माँ को समर्पित एक रचना लिख रहा हूँ...सूर्यकांत जी इस बार ये कहने का प्रयास किया है कि माँ अगर साथ न भी हो फिर भी कहाँ कहाँ है माँ...अपनी माँ, आपको और अर्चना जी को समर्पित है ये रचना....चला जो मुश्किल राह साथ मे चलती सी मिल जाती अम्मा...दुख का कभी... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
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[02 Jun 2010 09:48 AM]

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