सुनील कुमार की एक और कविता

दिल की बातें कविता रेलगाड़ी हम सब मुसफ़िर है उस रेल गाड़ी के, जिसको भ्रष्टाचार  का इंजन, बेईमानी के कोयले से खींच रहा है |रास्ते में पड़ने वाले स्टेशनजैसे  ईमानदारी ,सदाचार और त्याग हमें ... [पूरी पोस्ट]
writer Sunil Kumar
views
21
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
3
[02 Jun 2010 09:27 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix