युवा सोच युवा ख्यालात-कुलवंत हैप्पी-"चिट्ठाकार चर्चा"(ललित शर्मा)

चिट्ठाकार-चर्चा हमने किताबों में पढ़ा है फिल्मो में देखा की गुलाम होते थे. बर्बर युग में मानवों की नीलामी होती थी, गुलाम खरीदे बेचे जाते थे. उनका निजी सम्पत्ति की तरह उपयोग होता था. दासता का युग अमानवीय कृत्यों से भरा पड़ा है. खैर वह बर्बर कल था लोग असभ्य हे आज के मायने... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा
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[20 Jan 2010 23:15 PM]

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