इंसान ही नहीं वस्तुएं भी बदकिस्मत होती हैं.
सन 1733। क्रेमलिन के आइवान वैलिकी के गिरजाघर में एक विशालकाय घंटे को लगाने का प्रस्ताव पास हुआ। सोचा गया कि घंटा इतना बड़ा हो कि दुनिया भर में उसकी चर्चा हो। अंत में 200 टन भार के घंटे को बनाने की सोची गयी। नक्शा बन गया। सांचा भी तैयार हो गया। घंटे को...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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[02 Jun 2010 07:28 AM]



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