समरथ को नहीं दोष गुसाईं

महामानव तुलसीदास ने अपने महाकाव्य 'रामायण' में लिखा है 'समरथ को नहीं दोष गुसाईं' जिसका अर्थ यह लिया जा रहा है कि समर्थ व्यक्ति पर दोषारोपण नहीं किया जा सकता. देखने-सुनने में यह कुछ अटपटा सा लगता है किन्तु यदि इसे इस प्रकार समझा जाये कि 'समर्थ व्यक्ति में दोष... [पूरी पोस्ट]
writer देवसूफी राम कु० बंसल

मंतव्य और कर्म

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[02 Jun 2010 05:07 AM]

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