वैदिक कालीन क्रन्तिकारी दीर्घतमा मामतेय--3
दीर्घतमा की रचना व मनतब्य से लगता है की इस महापुरुष को किन्ही कारणों से दुस्प्रचारितहै.जहा दीर्घतमा कहता है की यह स्त्री कई ,यह पुरुष है यह सारा भेद शारीर क़ा है और इस भेद को कोई आख वाला ही जन सकता है,अँधा भला कहा से जानेगा। बिधवा माँ क़ा अँधा पुत्र होने...
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दीर्घतमा
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[17 Apr 2010 13:56 PM]



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