pashchim ki sanskriti se upja atankbad
आज सारा विश्व आतंकबाद से त्रस्तहै आखिर यह कैसा कल्चर है जो मानव को मानव से भेद करता है जहा शाहिशुनता क़े लिए कोई स्थान नहीं है इशाई राष्ट्रों क़ा इतिहास हिंसा हत्या से भरा है अपनी कलिमाओ को धोने क़े लिए पोप बार-बार माफ़ी मागते है अपने को सभ्य...
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दीर्घतमा
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[23 May 2010 05:01 AM]



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