राजा श्‍वेत की कथा - उत्तरकाण्ड (18)

संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण इन्द्र से वर प्राप्त करके रघुनन्दन राम महर्षि अगस्त्य के आश्रम में पहुँचे। वे शम्बूक वध की कथा सुनकर बहुत प्रसन्न हुये और उन्होंने विश्‍वकर्मा द्वारा दिया हुआ एक दिव्य आभूषण श्रीराम को अर्पित किया। वह आभूषण सूर्य के समान दीप्तिमान, दिव्य, विचित्र तथा... [पूरी पोस्ट]
writer जी.के. अवधिया

राम

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[02 Jun 2010 04:56 AM]

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