कब सोचा था जीवन एक धोखा है
है उदासी सी मन मेंखुश है सारा जहाँठहर सा गया हूँ मैं और चलता चला गया है कारवां।मंजिले पास आती रहीमैं खुद से दूर होता गयाचाहा था जो वो मिलता गयाख्वाहिशों का दम घुटता गयाइस शहर में मिला है काम बड़ामगर हुआ है छोटा नाम मेराहर काम की अपनी-अपनी तकलीफेंहर...
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विनय जायसवाल
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[02 Jun 2010 03:57 AM]



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