हज़पुरा

मेरी कहानियां ......मुझमें फिल्मों में जाने की नींव .....सन सत्तावन (५७)में हीपड़ गयी ,जब मैं सातवीं क्लास में पढ़ रहा था ....और साथ मिलादोस्त रतन का .........फिल्म देखने की आदत पड़ चुकी थी .....घरके बगल ,रेलवे स्टेशन के ही करीब ......सुदर्शन टाकीज था ...अब भीहै... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार
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[02 Jun 2010 04:10 AM]

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