लिखा नहीं जाता !
गीत और ग़ज़ल लिखे नहीं जातेलिख जाते हैं,कौन सा पल, कौन का निमिष ,मन के दर्पण परछोड़ दे एक लीकऔर मनभावों की लड़ियाँ, अक्षरों के मोती पिरोकरशब्दों के हार बनाने लगता है.जब सब ख़त्म हो जाएँतब उठाकर देखोकुछ न कुछअंतर्वेदना हो या उल्लासएक रचना बन...
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रेखा श्रीवास्तव
गीत और ग़ज़ल
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[02 Jun 2010 04:01 AM]



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