भटकनों में छुपे जिंदगी के मायने
बहुत दिनों तक लगातार मैं एक ही जगह रहते हुए ऊब जाता हूं। सुबह उठते ही वही लोग, दफ्तर में वही चेहरे। वही सब्जी वाला, वही नाई की दुकान पर बजता तेज गाना, परचूनी की दुकान पर मोल-तोल करती मोहल्ले की जानी-पहचानी औरतें। सुबह की वही खुशबू मेरी बालकनी में मिलती...
[पूरी पोस्ट]
ramkumar singh
10
0
0
0
7
[02 Jun 2010 03:17 AM]



Shuffle








