मोरा पिया मोसे बोलत नाहीं...
बीते कल से मेरे अनुज उमंग यहाँ करनाल आये हुए हैं। कल ही शाम को हम काईट्स देखने गये और पाया कि आलोचना की अजीब सी बीमारी भारतीय जन मानस मे घर करती जा रही है। आलोचना होनी चाहिये पर एक पैमाने के साथ। यहाँ तो हो यह रहा है कि जो पत्रकार नही बन पाया वो पूरी...
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चन्दन
करनाल
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[02 Jun 2010 02:04 AM]



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