मैं एक तन्हा जज़ीरा पा लूं
मेरी ज़बीं पे वो ज़ख्म देगा तो खून से तर ग़ज़ल कहूँगीअगर लगाएगा सुर्ख़ बिंदी मैं सज संवर कर ग़ज़ल कहूँगीखमोशियों के समन्दरों का ज़रा कनारा तो ढूँढने दोमैं एक तन्हा जज़ीरा पा लूं वहीँ पहुंचकर ग़ज़ल कहूँगीए मीरे -मजलिस तेरी सदारत क़ुबूल करके कहा है सबनेमगर...
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लता 'हया'
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[02 Jun 2010 02:02 AM]



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