ज़िंदगी, मौत और तलाक़
ज़िंदगी, मौत और तलाक़एक ही तस्वीर के तीन पहलू हैंएक मेंवो खींची जाती हैदूसरे मेंसजाई जाती हैतीसरे मेंफाड़ दी जाती है=॰=ज़िंदगी मिलती हैमौत आती हैतलाक़ होता हैवैसे हीजैसेदोस्त मिलते हैंरात आती हैऔरसवेरा होता है=॰=जब कोई सब कुछ छीन लेता हैतो उसे तलाक़ "देना"...
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Rahul Upadhyaya
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[02 Jun 2010 01:05 AM]



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