दो जून की रोटी !

अंधड़ ! सुबह जागा तो अचानक याद आया,वो पहली मुलाकात, दो जून याद आया,जब तुम आई थी, मेरी कुटी पे,चंचल, झील से दो नयना,चेहरे पे वो कातिलाना मुस्कराहट लिए,मैंने भी संकुचाते हुए पूछा था जब तुम्हारा नाम ,कुछ बलखाते , कुछ शर्माते हुए तुमनेअपना नाम बता भी दिया था !सुनकर,... [पूरी पोस्ट]
writer पी.सी.गोदियाल

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[02 Jun 2010 00:19 AM]

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