माइक्रो पोस्ट ... समाज और मनोरंजक सामग्री और सपनों की उड़ान
* जो समाज मात्र रोटी और मनोरंजक सामग्री पर संतोष कर लेता है वह एक निकृष्ट कोटि का समाज बन जाता है . * ऊँची उड़ाने उड़ने की अपेक्षा यह अच्छा है की आज की स्थिति का सही मूल्यांकन करें और उतनी योजनायें जिसे आज के साधनों से से पूरा का सकना संभव है ....
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महेन्द्र मिश्र
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[01 Jun 2010 20:03 PM]



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