'गुलाम तब जागे' -यादवचंद्र के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" का सप्तम सर्ग

अनवरत अनवरत के पिछले अंकों में आप यादवचंद्र जी के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" के छह सर्ग पढ़ चुके हैं। अब तक प्रकाशित सब कड़ियों को यहाँ क्लिक कर के पढ़ा जा सकता है। इस काव्य का प्रत्येक सर्ग एक पृथक युग का प्रतिनिधित्व करता है। युग परिवर्तन के साथ ही... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

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[01 Jun 2010 14:22 PM]

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