उसका आया है ख़त कि भूल जाऊं उसे

जीवन के पदचिन्ह आया है ख़त उसका कि अब भूल जाऊं उसे ग़ज़ल न रही वो मेरी, अब न गुनगुनाऊ उसे रहा यतीम ख्याल सुनहरा तेरे मेरे रिश्ते काजब न कोई निस्बत तुझसे तो क्या अपनाऊँ उसे उफ़क तक भी न पहुंचा अहसास अक़ीदत का खौफज़दा सजदों का सच, मैं क्या बतलाऊँ उसे बढ़ गया... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)
views
32
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
7
[01 Jun 2010 14:00 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix