मैंने ही क्या किया ..............( गीत )
मैंने ही क्या किया किसी की लट उलझी सुलझाने को ! क्यों कोई जुल्फें बिखराता , मेरी धूप बचाने को !! बांध बनाकर ये जलधारा जिसने साधी नहीं कभी ! दौनों हाथ जोड़कर जिसने , अँजुरी बाँधी नहीं कभी ! कोई नदिया रुकी नहीं है , उसकी प्यास बुझाने को !! क्यों कोई...
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ललितमोहन त्रिवेदी
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[01 Jun 2010 13:21 PM]



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