मैंने ही क्या किया ..............( गीत )

अनुरक्ति मैंने ही क्या किया किसी की लट उलझी सुलझाने को ! क्यों कोई जुल्फें बिखराता , मेरी धूप बचाने को !! बांध बनाकर ये जलधारा जिसने साधी नहीं कभी ! दौनों हाथ जोड़कर जिसने , अँजुरी बाँधी नहीं कभी ! कोई नदिया रुकी नहीं है , उसकी प्यास बुझाने को !! क्यों कोई... [पूरी पोस्ट]
writer ललितमोहन त्रिवेदी
views
17
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
7
[01 Jun 2010 13:21 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix