हफीज मेरठी : शायर के खून और पसीने से टपके सात सुर
शानो शौकत के लिये तू परेशान है और मेरी य’ तमन्ना कि तेरा किरदार बने यह बाँकपन है हमारा कि जुल्म पर हमने बजाय माला ओ फरियाद के शाइरी की है पैगाम ये मिला है जनाबे हफीज को अंजाम पहले सोच लें तब शाइरी करे पैरहन की मैने जब तारीफ की कहने लगे हम तुम्हे [...]...
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स्वार्थ
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[01 Jun 2010 12:55 PM]



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