एक इल्ज़ामः डॉ. राही मासूम रज़ा और सआदत हसन मण्टो पर
आज स्वप्निल कुमार आतिश से लम्बी साहित्यिक चर्चा होती रही. एक जैसा सोचने वाले मिल जाएँ तो ये फैसला मुश्किल हो जाता है कि विचार किसके हैं और आए किसके दिमाग़ में हैं. बात मण्टो से शुरू हुई और राही मासूम रज़ा पर खतम हुई. अब खतम हुई कि एक नए सिलसिले की शुरुआत...
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[01 Jun 2010 12:49 PM]



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