दोमट पर पहली छिड़कन से !
सावन की रिमझिम बरखा ने, बिजली कोई गिराई है, जल की बूंद पड़ी उस तन पर, आँच यहाँ तक आई है। रवि तप से सुलगी वसुधा, आज भस्म है नवयौवन से, दोमट पर पहली छिड़कन से, कुछ जलने की बू छाई है।स्वधा की परतों को छुआ जो, सुर्ख लाल तप्त अधरों ने, अम्बु की शीतलता झुलसी,...
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राजेन्द्र मीणा
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[01 Jun 2010 12:18 PM]



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