टुकड़ा टुकड़ा दुपहर

एक आलसी का चिठ्ठा दुपहर फैल गई है - शुभ्र चादर। मौन। दुपहर लोगों और जीवन धारण किए सब की गतिविधियों के होते हुए भी कितनी शांत लगती है! क्रियाकलाप की शांति, एक निश्चित कार्यक्रम में सब डूबते जाते हैं। ध्यान सी अवस्था कि सम्मोहन सी? - बन्दरों की चिक चिक, दूर कहीं से आती गीत... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिजेश राव
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[01 Jun 2010 12:40 PM]

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