फेंको अपनी झोला-झंडी,हो जाओ बिंदास रे जोगी-----(विनोद कुमार पांडेय)
अभी कुछ दिन पहले आज की ग़ज़ल पर एक संपन्न तरही मुशायरा में प्रस्तुत मेरी एक ग़ज़ल जिसमें मैं कुछ लाइन और जोड़ कर आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ..बैठ मेरे तू पास रे जोगी,बात कहूँ कुछ खास रे जोगीगेरुआ कपड़ा,चंदन,टीका,सब कुछ है,बकवास रे जोगीतुझे पता...
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विनोद कुमार पांडेय
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[01 Jun 2010 11:20 AM]



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