मेरे एकांतवास का परिणाम.... लीजिए देव बाबा की कुछ कविताएं
आज कुछ कवितायें प्रस्तुत कर रहा हूँ..... कुछ ऐसी कुछ वैसी.... कुछ इधर की कुछ उधर की..... बस मन हुआ की आज कुछ मिली जुली बातें की जाएँ..... वैसे अकेले रहनें और अकेले ज़िन्दगी बसर करना, आत्म चिंतन के लिये बहुत आवश्यक है... मन के भाव अजीब अजीब मोड लेते...
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देव कुमार झा
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[01 Jun 2010 11:08 AM]



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