है ये पल भर की चाँदनी, कल फिर रात है...

दिल की कलम से... सेठ जी चादर ताने सोए पड़े थे...लक्ष्मी जी के स्वप्न मे खोए पड़े थे...तभी उनका बेटा झूमते हुए आया...और सेठ जी को हिला हिला के जगाया...फिर बोला उठो मुझे कुछ बताना है...कल मुझे भी अपना जन्मदिन मनाना है...लक्ष्मी जी पे हमला सेठ जी कैसे सहते...पर इससे पहले की... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
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[01 Jun 2010 10:38 AM]

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