आदर्श की बातें-हिन्दी शायरी

 हिन्द केसरी-पत्रिका गनीमत है इंसान के पांव सिर्फ जमीन पर चलते हैं, उस पर भी जिस टुकड़े पर जमें हैं उसे अपना अपना कहकर सभी के सीने तनते हैं, हक के नाम पर हर कोई लड़ने को उतारू है। अगर कुदरत ने पंख दिये होता तो आकाश में खड़े होकर हाथों से एक दूसरे पर आग बरसाते, [...]... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिन्दीव्यंग्य कवितासंदेशमस्ती

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[01 Jun 2010 10:09 AM]

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