गांधी का दंतेवाड़ा उपवास
अब हमें यह मानने में देर नहीं करनी चाहिए कि तमाम शोषण, गैर-बराबरी,आदिवासी हकों की उपेक्षाओं और अपने ही जल-जंगल-जमीन से बेदखल कर देनेवाली सरकारी नीतियों के विरोध में उपजा नक्सलवाद अब एक खूनी क्रांति कीउद्घोषणा है। क्रांति तो इसे अब भी कही जानी चाहिए...
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Gopal Singh
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[01 Jun 2010 09:31 AM]



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