फासीवाद पर विजय के 65 वर्ष- अरूण माहेश्वरी
"मैंने द्वितीय विश्वयुद्ध में लड़ाई नहीं की थी। मैं महान देशभक्ति का युद्ध लड़ा था। सारी दुनिया जिंदा है सोवियत संघ की बदौलत।" ये शब्द थे उस बूढ़े रूसी कर्नल के जो 9 मई 1995 के दिन लेनिन मुसोलियम के पिछवाड़े में स्तालिन की...
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jagadishwar chaturvedi
समाजवाद
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[01 Jun 2010 08:56 AM]



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