तारीफ़ करने से पहले, जरा समझ तो लें?
आप तो, मियाँ, ख़्वामख़्वाह ही तारीफ़ें करते फिरते हैं. आइंदा से किसी के लिक्खे की तारीफ़ करने से पहले जरा सोच समझ लीजिए और “वाह! क्या लिखा है!”, “बढ़िया लिखा है!” जैसी टिप्पणी करने से पहले, तारीफ़ के ये दो शब्द कहने से पहले ये पूरा समझ लीजिए कि जो लिक्खा...
[पूरी पोस्ट]
Raviratlami
व्यंग्य
64
6
0
6
15
[01 Jun 2010 08:56 AM]



Shuffle








