अब आगे क्या होगा पता नहीं ?
एक बार मुझे अपने घर के रास्ते में एक कांटा चुभा । जूता छेद कर अन्दर तक चला गया । बहुत दर्द हुआ; बड़ा, लम्बा-मोटा था । मैंने निकाला और किनारे फैंक दिया फिर भूल गया । एक दो दिन तक हलकी पीड़ा रही; उसके बाद तो बिलकुल भी याद न रहा । कुछ दिन बाद मेरे बेटे ने...
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शंकर फुलारा
कांटे
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[01 Jun 2010 08:28 AM]



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