उफ! कोई इन्हें भी फांसी दे दे

अपना पंचू या तो हमारी सरकार का खून सूख गया है या फिर उसकी नक्सलियों से कोई गुप्त संधि है। वरना इतने बेगुनाहों का खून सड़कों पर, रेल की पटरियों पर और छोटे से घर के बाहर बने नाले में बहते देख सरकार का हृदय पिघलता जरूर। वह सिर्फ बातें नहीं करती, कुछ कड़े कदम भी... [पूरी पोस्ट]
writer lokendra singh rajput

पंचू

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[01 Jun 2010 08:04 AM]

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