“आओ चलें गाँव की ओर!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
छोड़ नगर का मोह, आओ चलें गाँव की ओर! मन से त्यागें ऊहापोह, आओ चलें गाँव की ओर! ताल-तलैय्या, नदिया-नाले, गाय चराये बनकर ग्वाले, जगायें अपनापन व्यामोह, आओ चलें गाँव की ओर! खेतों में हल लेकर जायें, भाभी भोजन लेकर आयें, मट्ठा बाट रहा है जोह! आओ चलें गाँव की...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
गीत
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[01 Jun 2010 08:06 AM]



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