फूल बन कर जो चुभते रहे ऐसे काँटों को क्या नाम दें ग़ैर होते तो हम सोचते कैसे अपने को इल्ज़ाम दें

लखनऊ ब्लॉगर एसोसिएशन बाद मुद्दत के हम\-तुम मिले मुड़ के देखा तो हैं फ़ासले चलते\-चलते ठोकर लगी यादें वादे आवाज़ देते न काश \-२ कि: बाद मुद्दत के हम\-तुम मिले मुड़ के देखा तो हैं फ़ासले चलते\-चलते ठोकर लगी यादें वादे आवाज़ देते न काश फूल बन कर जो चुभते रहे ऐसे काँटों को क्या... [पूरी पोस्ट]
writer कैरियर्स वर्ल्ड
views
10
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[01 Jun 2010 07:51 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix