आदमी भला सा लगता है.
जिसके चारों तरफ एक जलजला सा लगता है/वक़्त बुरा है मगर आदमी भला सा लगता है/हँसते हँसते उड़ा देता है दुनिया भर के गम,देखने में यूँ बड़ा वह मनचला सा लगता है/जिन्दगी किस मोड़ पर क्या रंग बदले कौन कहे,पत्थर भी कभी कभी गुड का डला सा लगता है/गम से...
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pawan dhiman
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[01 Jun 2010 07:31 AM]



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