मौत का यह सिलसिला
ये मौत है उनकी,जिनका कोई कसूर नहीं,मरने-मरने वालों का आपस में कोई नाता नहीं,बह रहे फिर भी खून,जैसे जीवन का कोई मोल नहींहर मौत के बाद मातम,फिर मौत,जनता के रखवाले कर रहे हैं ठेकेदारी,छोड़ राजीनीति, कूद पड़े हैं धंधे में,सिलसिला ये कब थमेगा,आँखों में चिंगारी...
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चन्दन कुमार
कोरा कागज़
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[01 Jun 2010 07:13 AM]



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