एक भयंकर कविता
गूंगों ने गाया गानाबहरों ने सुनकर मारी सीटी,लंगड़ों ने दिखाया नाचअंधों ने किया वाह-वाह,मुर्दों ने सुनाए लतीफेलूलों ने खूब बजाई तालियां,लोकतंत्र के अजब मंच परनेताओं ने क्या खूब की नौटंकी !...
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मिथिलेश श्रीवास्तव
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[01 Jun 2010 05:19 AM]



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