ग़ज़ल: दोस्त
सुना है मेरा दिल दुखाएगा दोस्त है दोस्ती निभाएगावो आंखों में शर्म रखता है सिर झुकाकर ही कतराएगाभीड़ में वो एहसान कर देगानज़रें मिलीं; तो मुस्कराएगादर्द का मेरा जब सफ़र होगाअलविदा कहने ही वो आएगायाद रखना वो कहेगा मुझेऔर वो मुझको भूल...
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अशोक जमनानी
होशंगाबाद
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[01 Jun 2010 05:00 AM]



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